Important: Use custom search function to get better results from our thousands of pages

Use " " for compulsory search eg:"electronics seminar" , use -" " for filter something eg: "electronics seminar" -"/tag/" (used for exclude results from tag pages)


 
 
Thread Rating:
  • 0 Votes - 0 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
nara lekhan on nari shaktikaran
Post: #1
Exclamation 

nari नारी सशक्तिकरण - पुरुष वर्चस्व को चुनौती
« PREV
NEXT »

मौलिक रूप से हमारा समाज एक पुरुष प्रधान समाज रहा है. महिलाओं को हमेशा यहां दोयम दर्जे का स्थान ही प्रदान किया गया है. पहले महिलाओं के पास किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता ना होने के कारण उनकी सामाजिक और पारिवारिक स्थिति एक पराश्रित से अधिक और कुछ नहीं थी, जिसे हर कदम पर एक पुरुष के सहारे की जरूरत पड़ती थी. वैसे तो आजादी के बाद से ही महिला उत्थान के उद्देश्य से विभिन्न प्रयास किए जाते रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में महिला सशक्तिकरण की बयार में अत्याधिक तेजी देखी गई है. इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप महिलाओं के आत्मविश्वास में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है और वे किसी भी चुनौती को स्वीकार करने के लिए खुद को तैयार करने लगी हैं. जहां सरकारें महिला उत्थान के उद्देश्य से नई-नई योजनाएं बनाने लगी हैं, वहीं कई गैर-सरकारी संगठन भी उनके अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं. नारी सशक्तिकरण के तहत महिलाओं के भीतर ऐसी प्रबल भावना को उजागर करने का प्रयास भी किया जा रहा है कि वह अपने भीतर छिपी ताकत को सही मायने में उजागर कर, बिना किसी सहारे के आने वाली हर चुनौती का सामना कर सकें.
आज की महिलाएं सिर्फ घर गृहस्थी को संभालने तक ही सीमित नहीं रही हैं, बल्कि हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है. व्यावसायिक क्षेत्र हो या पारिवारिक, महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि वे हर वो काम कर सकती हैं जो कभी पुरुषों के योग्य समझा जाता था. कुछ समय पहले तक जिन व्यवासायिक क्षेत्रों में केवल पुरुषों का ही वर्चस्व हुआ करता था, अब वहां महिलाओं को काम करते देखकर हमें आश्चर्य नहीं होता है. शिक्षा और आत्म-निर्भर बन जाने के कारण वह अपने ऊपर विश्वास कर, अपने जीवन संबंधी निर्णय लेने लगी हैं.
लेकिन नारी सशक्तिकरण की पैरवी करते हुए हम इस बात को नकार नहीं सकते कि जब हम किसी एक को सशक्त करने की बात करते हैं तो स्वाभाविक तौर पर हम दूसरे व्यक्ति के अधिकार क्षेत्र को सीमित कर रहे होते हैं. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए जरूरी है कि पुरुष वर्चस्व की महत्ता को कम कर दिया जाए. ऐसे हालातों में भारतीय पुरुष जो महिलाओं का दमन-शोषण करना अपना शौक समझते थे, वह इस बात को वहन नहीं कर पा रहे कि दबी-कुचली महिलाएं अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने लगें. यहीं कारण है कि महिला सशक्तिकरण को बहुत अधिक तरजीह दिए जाने के बावजूद पुरुष वर्ग में एक तबका ऐसा भी है जो महिलाओं की आजादी को अपने लिए घातक मानकर चल रहा है. अपने झूठे पुरुषत्व को कायम रखने और महिलाओं को उनसे निम्न होने का अहसास दिलवाने के लिए वह कभी उसके सम्मान के साथ खिलवाड़ करता है तो कभी उस पर हाथ उठाता है.
हम बड़े गर्व के साथ सरकारों द्वारा बनाई जा रही योजनाओं को अपना लेते हैं. लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि महिलाओं के लिए बनाई गई विभिन्न योजनाएं उन्हें अधीनस्थ और शोषित होने का ही अहसास दिलवाती हैं. घरेलू हिंसा को रोकने और स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे कानून हमारे समाज की इसी कड़वी हकीकत को बयान करते हैं कि समय परिवर्तित हो जाने के बाद भी पुरुष आज भी स्वयं को महिलाओं को सम्मान देना पसंद नहीं करते. उनकी मानसिकता आज भी पहले जैसी ही है. विवाह के तुरंत बाद ही उसे अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने का अधिकार प्राप्त हो जाता है. बेटी को शादी के बाद दूसरे घर ही जाना है तो उसे पढ़ा-लिखा कर खर्चा क्यों किया जाए. लेकिन जब सरकार उन्हें लालच देती है, तो वह उसे पढ़ाने के लिए भी तैयार हो जाते हैं और हम यह समझने लगते है कि परिवारों की मानसिकता बदल रही हैं.
दुर्भाग्यवश नारी सशक्तिकरण केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सिमटकर रह गया है. एक ओर बड़े-बड़े शहरों और महानगरों में रहने वाली महिलाएं शिक्षित, आर्थिक रुप से स्वतंत्र, विभिन्न क्षेत्रों में ऊंचे पदों पर काम करने वाली और आधुनिक विचारधारा महिलाएं हैं, जो पुरुषों के दमन को किसी भी रूप में सहन नहीं करना चाहतीं. अपने साथ हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध वह अपने दम पर लड़ना जानती हैं. इनकी संख्या भले ही कम हो, लेकिन उन्होंने जो सम्मानजनक स्थिति प्राप्त की है, वह बेहद प्रशंसनीय है. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में तो आज भी नारी के अस्तित्व पर प्रश्नचिंह ही लगा हुआ है. गांवों में रहने वाली महिलाएं ना तो अपने अधिकारों को जानती हैं और ना ही उनके महत्व को समझती हैं. जिस कारण वह पति के अत्याचारों और सामाजिक लांक्षनों को अपनी नियति समझकर सहन करने को विवश हो जाती हैं.
हमारा पुरुष प्रधान समाज जिन संस्कारों, परंपराओं और मर्यादाओं की दुहाई देकर महिलाओं को अपने द्वारा निर्मित दायरे में बांध कर रखना चाहता हैं, पुरुष द्वारा उन्हीं सीमाओं का अतिक
[font=Verdana][/font]
Post: #2
The empowerment of women has become an important topic of discussion in development and economy. It can also point out approaches with respect to other trivialized genres in a particular political or social context. The economic empowerment of women refers to the ability of women to enjoy their right to control and benefit from resources, assets, income and their own time, as well as the ability to manage risk and improve their economic situation and wellness. Although often used interchangeably, the broader concept of gender empowerment refers to people of any gender, emphasizing the distinction between biological sex and gender as a role. Therefore, it also refers to other marginalized genders in a particular political or social context.

Land rights offer a key way to empower women economically, giving them the confidence they need to address gender inequalities. Often, women in developing and underdeveloped countries are legally restricted from their lands on the sole basis of gender. Having a right to their land gives women a kind of bargaining power they would not normally have; In turn, they gain the ability to affirm themselves in various aspects of their lives, both inside and outside the home.

Another way to empower women is to assign responsibilities that normally belong to men. When women have economic empowerment, it is a way for others to see them as equal members of society. Through this, they achieve more self-esteem and confidence for their contributions to their communities. Simply including women as part of a community can have radical positive effects. In a study conducted by Bina Agarwal, women were given a place in a forest conservation group. This boosted the efficiency of the group, and women gained self-esteem, while others, including men, saw them with more respect.

It has been argued that participation, which can be seen and won in various ways, is the most beneficial form of gender empowerment. Political participation, whether the ability to vote and express opinions, or the possibility of running for office with the fair possibility of being elected, plays a very important role in the empowerment of women. However participation is not limited to the scope of the policy. It can include participation in the home, in schools and the ability to make decisions for oneself. It can be said that this last participation must be achieved before it can move on to broader political participation. When women have the agency to do what they want, a greater equality between men and women is established.

It is argued that micro-credit also offers a way to empower women. Governments, organizations and people have seized on the attractiveness of micro-finance. They hope that lending money and credit will allow women to function in business and society, which in turn allows them to do more in their communities. One of the main objectives in the micro-finance base was the empowerment of women. Loans with low interest rates are given to women in developing communities with the hope that they can start a small business and support their families. However, it must be said that the success and effectiveness of micro-credits and microloans is controversial and constantly debated.
 

Marked Categories : yhsm inucbr 001, nara lakhen,

[-]
Quick Reply
Message
Type your reply to this message here.

Image Verification
Image Verification
(case insensitive)
Please enter the text within the image on the left in to the text box below. This process is used to prevent automated posts.

Possibly Related Threads...
Thread: Author Replies: Views: Last Post
  dhara ka adhar nari short paragraph in hindi free download quickly Guest 1 0 17-11-2017 11:21 AM
Last Post: jaseela123
  pdf on nari siksha Guest 1 206 14-08-2017 09:54 AM
Last Post: jaseela123
  nari sashaktikaran in sanskrit wiki Guest 1 348 11-08-2017 02:11 PM
Last Post: jaseela123
  nari sashaktikaran par nibandh Guest 1 388 28-07-2017 03:33 PM
Last Post: jaseela123
  nari sasakti karana full essay on odia language Guest 1 0 24-10-2016 10:44 AM
Last Post: amrutha735
  speech for nari shakti in gujarati Guest 1 0 09-09-2016 09:46 AM
Last Post: jaseela123
  hindi speech of swachata aur nari sashaktikaran Guest 1 3,969 15-11-2015 10:27 PM
Last Post: Guest
  an essay on nari sashaktikaran in hindi language Guest 1 2,976 07-11-2015 06:11 PM
Last Post: Guest
  pdf in hindi nari sashaktikaran Guest 2 1,710 09-04-2015 12:30 AM
Last Post: Ganga prasad singh
  nari sashaktikaran par slogan in hindi Guest 0 7,023 02-08-2014 04:15 PM
Last Post: Guest
This Page May Contain What is nara lekhan on nari shaktikaran And Latest Information/News About nara lekhan on nari shaktikaran,If Not ...Use Search to get more info about nara lekhan on nari shaktikaran Or Ask Here

Options: